अंतिम जन
गुरुवार, 14 सितंबर 2017
जब भी खिलते फूल जमीं पे,खुशबू ज़हाँ से रौशन हो होता है
मौसमें बरसात के आते ही महक उठती फ़िज़ा में बहार जैसे
नीरज
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