शनिवार, 2 सितंबर 2017


  • आज अँधेरा है बहुत और बादल भी नहीं है...
  • जी करता है रोलूँ, जिंदगी तुझपे हँसी आता है...
  • मुश्किलें आसां हो गई, जबसे परेसां परेसां हो गई...
  • अब यूँ न मोहब्बत को रुसवा करो
    यूँ मेरी चाहतों का न शिकवा करो
    न मिट पायेगा न मिटाया करो 
    उस लम्हें का न याद दिलाया करो 
    रोज खिलती रहो न मुड़झाया करो
    अपनी खुशबुओं से हमें नहलाया करो
  • कुछ भी छुप-छुप के करना और छुपा-छुपा के करना सही पर बुरा है...
  • सारे परेशानीयों की वजह है, सही ज्ञान का अभाव है...
  • सभ्यता और अस्तित्व के फर्क को हम आप कैसे देखते हैं...
  • जीवन के लिए भोजन, शरीर और वाह्य जगत का ज्ञान होना जरुरी है...
  • हो कदम कदम पे अगर कातिल तो समझीये दुश्मन कोई और नहीं धर्म के शिवा...
नीरज

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